पुरुष बांझपन: आधुनिक जीवनशैली और बढ़ता जोखिम
डॉ. प्रोफ़ेसर (कर्नल) पंकज तलवार, वीएसएम
महासचिव, इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी (IFS) | बांझपन विशेषज्ञ
हाल ही में रांची में आयोजित एक फर्टिलिटी कार्यशाला के दौरान, देश के प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. पंकज तलवार ने आगाह किया कि भारत के लगभग 40 प्रतिशत पुरुष बांझपन की समस्या का सामना कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें चिकित्सा कारणों से ज्यादा हमारी लाइफस्टाइल जिम्मेदार है।
क्यों बढ़ रही है यह समस्या?
- गैजेट्स का अधिक उपयोग: लैपटॉप को गोद में रखना और मोबाइल का अधिक उपयोग अंडकोष के तापमान को बढ़ाता है, जो शुक्राणुओं के लिए घातक है।
- जिम सप्लीमेंट्स: मसल्स बनाने के चक्कर में लिए जाने वाले अनरेगुलेटेड प्रोटीन और स्टेरॉयड शुक्राणु उत्पादन को स्थायी रूप से बंद कर सकते हैं।
- पर्यावरणीय कारक: गर्म भट्टियों या फैक्ट्री में काम करने से टेस्टिकुलर टेम्परेचर बढ़ता है।
- तनाव और नींद: मानसिक तनाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देता है।
उम्मीद की किरण: उपचार और रोकथाम
डॉ. तलवार के अनुसार, बांझपन कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। सही मार्गदर्शन से अधिकांश मामलों को ठीक किया जा सकता है:
इन बातों का रखें ध्यान:
- अपने आहार में एंटी-ऑक्सीडेंट्स जैसे ताजे फल और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें।
- शुक्राणुओं की क्वालिटी सुधारने के लिए कम से कम 90 दिनों (3 महीने) तक स्वस्थ दिनचर्या का पालन करें।
- लैपटॉप को हमेशा टेबल पर रखकर उपयोग करें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी हार्मोनल सप्लीमेंट न लें।
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📍 गुरुग्राम | नई दिल्ली

