चमत्कार! अब महिला की बांह (Forearm) में तैयार होंगे अंडाणु
डॉ. प्रोफ़ेसर (कर्नल) पंकज तलवार, VSM, MD, PhD
मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन नंबर: HMC-HN 16822
मेडिकल साइंस के क्षेत्र में भारत ने एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। अब कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को हराने वाली महिलाएं भी माँ बनने का सुख प्राप्त कर सकेंगी। एक ऐतिहासिक प्रक्रिया के तहत, डॉक्टर पहली बार एक महिला की बांह के अगले हिस्से (Forearm) में अंडाणु (Eggs) विकसित करने में मदद कर रहे हैं।
कैंसर और बांझपन का समाधान
अक्सर कैंसर के इलाज (कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी) के दौरान महिलाओं में समय से पहले ‘मीनोपॉज’ और बांझपन की समस्या आ जाती है। लेकिन आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल के विशेषज्ञों ने इस समस्या का हल खोज निकाला है।
यह प्रक्रिया कैसे काम करती है?
डॉ. पंकज तलवार के अनुसार, इस तकनीक को निम्नलिखित चरणों में पूरा किया जाता है:
- टिश्यू को सुरक्षित करना: कैंसर का इलाज शुरू होने से पहले ही महिला के ओवेरियन टिश्यू (गर्भाशय ऊतक) को सुरक्षित (Freeze) रख लिया जाता है।
- इंप्लांटेशन: जब महिला कैंसर से पूरी तरह मुक्त हो जाती है, तो इन सुरक्षित टिश्यू को लोकल एनेस्थीसिया की मदद से उसकी बांह (Forearm) की त्वचा के अंदर इंप्लांट किया जाता है।
- अंडाणु का विकास: विशेष दवाओं की मदद से उस टिश्यू में अंडे विकसित किए जाते हैं।
- Retreival और IVF: जब वहां मटर के दाने के बराबर उभार आता है, तो उन अंडों को निकाल लिया जाता है और IVF तकनीक के जरिए गर्भधारण कराया जाता है।
डॉ. पंकज तलवार का अनुभव
डॉ. पंकज तलवार ने बताया कि कैंसर का उपचार अक्सर प्रजनन क्षमता को नष्ट कर देता है। इस तकनीक (Oncofertility) के माध्यम से हमने अब तक कई मरीजों के ओवेरियन और टेस्टिकुलर टिश्यू को सुरक्षित किया है। यह प्रयोग भारत में पहली बार हो रहा है और यह भविष्य में हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनेगा।
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